प्रख्यात इंजीनियर, भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को चिह्नित करने के लिए 15 सितंबर को पूरे भारत में राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
यह दिन इंजीनियरों की उपलब्धियों को याद करता है और उन्हें सुधार और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करता है।
श्रीलंका और तंजानिया भी सर M विश्वेश्वरैया के नवाचारों का सम्मान करने के लिए इंजीनियर्स दिवस मनाते हैं।
- 15 सितंबर 2021 को 54वां राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस मनाया जा रहा है।
- राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस 2021 सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की 160 वीं जयंती का प्रतीक है, जिनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुद्दनहल्ली गाँव में हुआ था।
पृष्ठभूमि:
i.भारत सरकार ने सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस के रूप में घोषित किया।
ii.पहली बार राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस 15 सितंबर 1968 को मनाया गया था।
आयोजन 2021:
i.इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), (IEI) ने राष्ट्रीय इंजीनियरिंग दिवस के एक भाग के रूप में एक केंद्रीय वेबिनार का आयोजन किया है।
ii.केंद्रीय वेबिनार का विषय “इंजीनियरिंग फॉर स्किल डेवलपमेंट & एम्प्लॉयमेंट इन कबटिंग COVID -19” है।
सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के बारे में:
i.मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसमें ब्लॉक सिस्टम, दक्कन नहरों में सिंचाई, खड़कवासला जलाशय, ग्वालियर और कृष्णराजा सागर बांध में जल बाढ़ के साथ सिंचाई प्रणाली शामिल हैं।
ii.समाज में उनके योगदान के कारण उन्हें लोकप्रिय रूप से ‘आधुनिक मैसूर के पिता’ के रूप में जाना जाता था। उन्होंने 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान के रूप में कार्य किया और मैसूर साबुन फैक्ट्री, बैंगलोर कृषि विश्वविद्यालय और स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की स्थापना की।
सम्मान:
i.भारत सरकार ने उन्हें 1955 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।
ii.किंग जॉर्ज V (पंचम) ने उन्हें ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य (KCIE) के नाइट कमांडर के रूप में नाइट की उपाधि दी।
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), (IEI) के बारे में:
अध्यक्ष– Er नरेंद्र सिंह
सचिव और महानिदेशक– मेजर जनरल मोहन जीत सिंह स्याली
मुख्यालय– कोलकाता, पश्चिम बंगाल
स्थापित- 1920